पर्वों की वैज्ञानिकता को जानने से बढ़ेगा विश्वास- जनरल व्यंकटेश
बेरीबाग स्थित मोक्षायतन अन्तर्राष्ट्रीय योगाश्रम में शरद पूर्णिमा से धन्वंतरि जयंती तक चलने वाले आरोग्य व स्वास्थ्य पर्व की शुरुआत सर्व कल्याण यज्ञ, पूर्णिमा की स्निग्ध धवल चंद्रिका में तैयार की गई विशेष पौष्टिक खीर, नेत्र ज्योति वर्धक ओस कण व हृदय को निरोग व पुष्ट करने वाले लावंग सेव आदि तैयार करने, राम नाम सत्संग, चन्द्र ध्यान व त्राटक के सामूहिक प्रयोगों से करते हुए योग गुरु पद्मश्री स्वामी भारत भूषण ने शरद पूर्णिमा पर्व को आयुर्वेद और अध्यात्म का विलक्षण संगम बताया और कहा शरद पूर्णिमा की चंद्रिका में तैयार अनेक जीवनदाई वन औषधियों को वनस्पतियों से प्रार्थना पूर्वक की जांच ना करके प्राप्त किए जाने की परंपरा है।
उन्होंने कहा कि आध्यात्मिक आनंद और शारीरिक स्वास्थ्य अन्योन्याश्रित हैं इसीलिए इस पर्व पर पुष्टिकर औषधियों के साथ साथ त्राटक व ध्यान के माध्यम से परम आनंद तक पहुंचते हुए महारास की परंपरा योगेश्वर कृष्ण के समय से ही लोकप्रिय रही है। पूर्णिमा के विशेष यज्ञ की महिमा बताते हुए उन्होंने कहा कि निरंतर अभ्यास में सत्संग से व्यक्ति अधम स्थिति से परम स्थिति तक विकास कर सकता है जिसका प्रत्यक्ष उदाहरण शरद पूर्णिमा को जन्म लेने वाले महर्षि बाल्मीकि स्वयं है जिन्होंने भगवान राम का जन्म होने से पहले ही रामायण जैसा ग्रंथ मानवता को दिया।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित भारतीय सेना के लेफ्टिनेंट जनरल पी आर व्यंकटेश ने कहा कि आज इस अनूठे कार्यक्रम का साक्षी बना मेरे जीवन का लाइफ टाइम एक्सपीरियंस है क्यूंकि पर्वों व परंपराओं का वैज्ञानिक विवेचन यहां देखने मिला जिसके अभाव में लोग इनसे विमुख हो चले थे। उन्होंने कहा कि पर्वों की वैज्ञानिकता को जानने से ही इनपर विश्वास बढ़ेगा।
जनरल व्यंकटेश को स्वामी भारत भूषण व आर वी सी कमांडेंट कर्नल मंगल सिंह ने महारास का प्रतीक राधाकृष्ण विगृह स्मृतिचिन्ह के रूप में भेंट किया। सचिव नंद किशोर शर्मा व मुख्य योगाचार्या अनीता शर्मा के कुशल संचालन में देर रात तक चले इस कार्यक्रम में हरगुन अरोरा अथ योगानुशासनम संबोधन , सौरभ धनगर की कविता, वासिल खान द्वारा अमीर खुसरो की रचना का पाठ्य , आशीष सलीम की कोराना पर आधारित स्वरचित कहानी, प्रदीप कांबोज का भक्ति गीत, जसविंदर कौर व अमरजीत बग्गा के सबद पाठ, अमरनाथ व ललित वर्मा की लोटपोट करने वाली हास्य प्रस्तुति के साथ साथ सभी की सामूहिक भागीदारी में अध्यात्मिक अंताक्षरी अविस्मरणीय रही।
अंत में वरिष्ठ योगाचार्य डा अशोक गुप्ता के नेतृत्व में चन्द्र उपासना मंत्रों के उच्चारण के बाद सभी ने प्रसाद ग्रहण किया।